Sunday, October 2, 2011

MERI KAVITA

अँधेरे की उमर 

रगों में जब 
पसरने  लगे  अँधेरा 
और साथ छोड़ दे 
दुनिया भर की बिजलिया 
प्रवेश करना अपने भीतर 
वहां  जल रहे होंगे  सहश्रो  दीये  !!  
    
अँधेरे की उमर  

चार पहर से अधिक 
भला  कब हुई  !!
खटखटाना  
साहस  और  धैर्य  कीं  कुंडिया  
सूरज  खुद  दरवाजा  खोलेगा  !!